जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म की समय पर पहचान एवं उपचार बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए है अत्यंत आवश्यक - डॉ. अमिता जैन
जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म की समय पर पहचान एवं उपचार बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए है अत्यंत आवश्यक - डॉ. अमिता जैन
एम्स रायबरेली में विश्व थायरॉयड दिवस के अवसर पर जनजागरूकता हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्व थायरॉयड दिवस का थीम था, “जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म के लिए नवजात शिशुओं की सार्वभौमिक स्क्रीनिंग आवश्यक है”। कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता, विशेषकर माताओं में जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म (Congenital Hypothyroidism) के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस अवसर पर अस्पताल के ओपीडी परिसर में एमबीबीएस विद्याथियों द्वारा जागरूकता लघु नाटिका के माध्यम से मरीजों एवं उनके तीमारदारों को सरल भाषा में बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में मरीजों, अभिभावकों एवं चिकित्सा छात्रों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों ने थायरॉयड रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान एवं उपचार पर आधारित आकर्षक पोस्टर प्रस्तुत किए।
यह कार्यक्रम बाल रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर और बाल चिकित्सा एंडोक्राइनोलॉजी प्रभारी डॉ. नमिता मिश्रा द्वारा आयोजित किया गया। डॉ. नमिता ने माताओं को संबोधित करते हुए जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म के लक्षण, जांच एवं उपचार के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं में थायरॉयड संबंधी समस्याओं की प्रारंभिक जांच से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
अस्पताल के अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ नीरज ने आम जनता को थायराइड से जुड़ी समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया और अभिभावकों को नियमित स्वास्थ्य जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बाल रोग विभाग को इस कार्यक्रम के लिए बधाई दी। साथ ही पोस्टर व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार भी वितरित किए।
ईएनटी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनन्या सोनी ने मरीजों को थायरॉइड से संबंधित सर्जरी के बारे में जानकारी दी। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार ने सभी रेजिडेंट्स, स्टाफ और फैकल्टी की सरहना की।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म की समय पर पहचान एवं उपचार बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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