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टीईटी के मामले को लेकर शिक्षकों का उमड़ा हजूम, कहा-कानून में करें संशोधन,जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन


 टीईटी के मामले को लेकर शिक्षकों का उमड़ा हजूम, कहा-कानून में करें संशोधन,जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, पीएम को भेजा ज्ञापन


रायबरेली। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने के बाद इसका विरोध तेज हो गया है। गुरूवार को उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले हजारों शिक्षकों ने एकत्रित होकर टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) को लेकर जारी कानून में संशोधन की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। 

शिक्षकों ने प्रदर्शन करके केंद्र सरकार ने इस कानून में संशोधन करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। इसके साथ ही संघ के पदाधिकारियों ने आज नेता प्रतिपक्ष व जिले के सांसद राहुल गांधी से मिलकर कानून में संशोधन कराए जाने की मांग की है। 

शिक्षकों ने कहा, देशभर के 40 लाख और प्रदेश के चार लाख परिवारों शिक्षकों पर करें दया


जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र यादव ने कहा कि 29 जुलाई 2011 से उत्तर प्रदेश में नई नियुक्तियों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया है। संघ ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले नियुक्ति हुए शिक्षकों की टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया जाए।


 शिक्षकों ने यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के संदर्भ में की गई है। उन्होंने कहा कि किसी नौकरी की तैयारी करने वाला कोई अभ्यर्थी नौकरी पाने के दस, बीस, तीस बरस बाद उस परीक्षा को उतने ही सफलतापूर्ण ढंग से पास कर पाता है जितना कि नौकरी पाने के लिए? अदालत के इस फैसले ने देशभर के करीब 40 लाख  शिक्षकों को झटका दे दिया है। 


उत्तर प्रदेश के चार लाख शिक्षकों का भी अहित प्रभावित हुआ है। सरंक्षक समर बहादुर सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वालों में अधिकतर पचास से पचपन वर्ष की आयु वाले वे शिक्षक हैं जो तमाम शारीरिक व्याधियों के बाद भी अपने काम को पूरी लगन और निष्ठा के साथ करने के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी में आने के बाद टीईटी की अनिवार्यता को थोपना उचित नहीं है।


जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, पीएम को भेजा ज्ञापन


जिला महामंत्री सियाराम सोनकर व प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि इस फैसले के मुताबिक आठवीं तक की कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों को टीईटी- यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। अगर वे ये परीक्षा नहीं देते तो उन्हें अवकाश ग्रहण करना होगा।अगर वे फेल हो गए तो शायद उनकी नौकरी ही चली जाए। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट प्रदान करने हेतु अधिनियम में संशोधन हेतु एक मांग कर रहे हैं। आज हम लोग प्रधानमंत्री  पत्र देश के प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनसीटीई के कानून में संशोधन की मांग


जिला कोषाध्यक्ष शिवशरण सिंह व प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री शैलेश यादव ने कहा कि वर्तमान में टीईटी की परीक्षा को लेकर तमाम तकनीकी बाधाएं हैं, सरकार को उन सब बाधाओं को दूर करना होगा। पीएम को ज्ञापन देने के बाद 13 से 26 सितंबर तक लोकसभा सांसदों एवं राज्य सभा सांसदों के माध्यम से भारत सरकार को संशोधन करने का मांग पत्र दिया जाएगा। आज हम लोगों ने राहुल गांधी से मुलाकात की। उन्होंने पूरा आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे को जरूर उठाएंगें।  उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और संशोधन हेतु कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो देश तथा प्रदेश का लाखों बेसिक शिक्षक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

इस अवसर पर महिला शिक्षक संघ की कोषाध्यक्ष सीमा कुमारी, अटेवा के जिलाध्यक्ष इरफान अहमद, शिवसागर पाल, पन्नालाल, शांति अकेला, आशीष तिवारी, गौरव युवराज  लक्ष्मी, हरिकेश यादव, साधना शर्मा, सुनीता सिंह , राकेश पटेल, नीरज, मुकेश, सुनील यादव, शिवकुमार सिंह,लालबहादुर यादव, मेराज अहमद, रविप्रकाश श्रीवास्तव, चन्द्र प्रकाश, धर्मेंद्र वर्मा, सुनील मिश्र, शिवेंद्र सिंह, शिवप्रताप मौर्य सहित हजारों शिक्षक उपस्थित रहे।



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