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मंजिले उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है " पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान होती है।

मंजिले उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है " पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान होती है। रायबरेली में एक ओर जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सबको समान शिक्षा व समान अधिकार की बात की जाती है तब ऐसे में लगता है कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। दिव्यांगों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करने के लिए जिला स्तर पर 42 विशेष शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। जो कि ही दिव्यांग बच्चों के सापेक्ष में बहुत कम है। इस वर्ष के सर्वे के अनुसार जनपद रायबरेली में लगभग 2900 से दिव्यांग बच्चे चिन्हित किए गए हैं, इन दिव्यांग बच्चों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी इन विशेष शिक्षकों के ऊपर है, यह दिव्यांग बच्चे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित है और यह विशेष शिक्षक इन बच्चों को शिक्षित करने हेतु अलग-अलग विद्यालयों में जाकर एक दिन में ही 2 से 3 विद्यालयों में जाकर शैक्षिक रिपोर्ट देते हैं । क्योंकि राज्य परियोजना का आदेश है कि उक्त शिक्षक  1 दिन में दो से तीन विद्यालयों में जाकर शैक्षणिक सपोर्ट करेंगे। इन विशेष शिक्षकों की नियुक्ति जिला बेसिक शिक...

कांग्रस के लोग एम्स की लड़ाई अब दिल्ली में लड़ेंगे

रायबरेली  में कांग्रेस का गढ माना जाता है लेकिन आज खुद की जमीन पर बनी योजनाओ में भाजपा सरकार अवरोध खड़ी करती नजर आ रही है , क्योकि यहां पर कांग्रेस का दिया हुआ एम्स में केंद्र सरकार ने कटौती कर दी है / इसी को लेकर कांग्रेस के लोग यहां की जनता को धरने के माध्यम से बताना चाहते है की मोदी सरकार इस जिले के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है / ऐसे में भाजपा  ने कांग्रेस के   गढ में विकास को लेकर आपसी तनातनी मचा दी  है । क्योकि योगी सरकार के लोग विकास कराने की कोषिष तो कर रहे है लेकिन उसका श्रेय खुद लेना चाहते है। फिर चाहे कांग्रेस की पुरानी सारी योजनाये क्यों न हो। और इसको लेकर कांगे्रस के कार्यकर्ता लोग सड़कों पर एवं धरना प्रदर्षन करनेे पर मजबूर हो गये है।  सरकार द्धारा एम्स के बजट में कटौती किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने आंदोलन षुरु कर दिया है।  कांग्रेसियों ने षहीद चैक पर सामूहिक उपवास रखकर गांधीगिरी तरीके से विरोध प्रदर्षन किया। सांसद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि  केएल षर्मा ने कहा कि वर्श 2009 में एम्स के लिए 823 करोड़ रुपये स्...

-शहीद के परिवार को सदर विधायक अदिति सिंह ने 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।

-शहीद के परिवार को सदर विधायक अदिति सिंह ने 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। रायबरेली सदर विधायक सुश्री अदिति सिंह आज दोपहर 12 बजे शहीद अजयपाल सिंह उर्फ़ कुलदीप सिंह के घर पहुंची। इस दौरान उन्होंने शहीद के परिवार को ढांढस बंधाते हुए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।  शहीद के परिवार के साथ दुःख साझा करते हुए सुश्री अदिति सिंह ने कहा वह हमेशा शहीद अजयपाल सिंह के परिवार के साथ हैं। उन्हें कभी भी किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जायेगी। सुश्री अदिति सिंह ने कहा कि जिले की मिटटी के लाल के जाने का गम हम सबको है लेकिन शहीद अजयपाल सिंह ने देश के लिए शहीद होकर जिले का मान बढ़ाया है।  सुश्री अदिति सिंह ने कहा कि भारत माँ के लिए प्राणों को न्यौछावर करने वाले शहीद अजयपाल सिंह को मेरा शत-शत नमन है। उनकी शहादत हमारे लिए प्रेरणा है। उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया है।  सुश्री अदिति सिंह ने कहा कि रायबरेली सदैव से त्याग और बलिदान की धरती रही है। उन्हे इस बात का गर्व है कि वह ऐसे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहाँ  शहीद अजयपाल सिंह जैसे वीर ...

वीवीआईपी जिले में मनरेगा में अब नहीं मिल रहा हर हाथ को काम

वीवीआईपी जिले में मनरेगा में अब नहीं मिल रहा  हर हाथ को काम     देरी से मजदूरी का भुगतान होने पर शहर की तरफ पलायन कर  श्रमिक रायबरेली जिले के श्रमिक मनरेगा के काम से अब दूर भाग रहे है। रोजगार गारंटी के बावजूद मजदूरों को मनरेगा योजना में देरी से होने वाले भुगतानके चलते श्रमिकों का इससे मोहभंग हो रहा है। हालात ये है कि चार लाख से अधिक श्रमिकों में से केवल दो लाख श्रमिकों को ही रोजगार मिल पा रहा है। अफसर यही दावा कर रहे है कि जो श्रमिक काम मांगतें है, उन्हे काम दिलाया जा रहा है। गांवों में नाली, खडंजा समेत अन्य कार्य तो चल रहे है, लेकिन  इसमें और तेजी लाए जाने की जरुरत है, तभी हर हाथ को काम मिल पाएगा।  कांग्रेस अध्यक्ष एवं जिले की सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में विभागीय आंकड़ों  पर गौर करें तो यहां परा 989 ग्रामसभाएं है। वर्श 2018 के मार्च माह तक इन गांवों में मनरेगा के तहत 95 करोड़ रुपयें खर्च किए जाने है। अब तक 35.32 करोड़ रुपया खर्च किया जा सका है। कुल मनरेगा श्रमिकों की संख्या चार लाख 842 श्रमिक  ही एक्टिव है। यानि इतने ...

रायबरेली गांव में जर्मनी के दूल्हा और दुल्हन अपने बच्चो के सामने की शादी

सरे जहां से अच्छा हिंदुस्तां  हमारा  इससे खूबसूरत  मुल्क कोई और नही । तभी तो यहां के नीति रिवाजजो देखता हैं, वह अपना दिल दे बैठता है। नदियां फूल पहाड़ और पुरातन धरोहरों को देखने और आने वाले पर्यटक भी यहां की संस्कृति में ऐसे खो जाते है समानो उन पर कोई जादू हो गया हो। ऐसी ही एक नई कहानी रायबरेली के अमांवा ब्लाक के मुराई का पुरवा गांव में जन्म लेगी। यहां जर्मनी के दुल्हे राजा को वहीं की दुल्हनियां जयमाला पहनाएगी। मंडप विषुद्ध रुप से भारतीय छाप वाला होगा। हिंदू रीति रिवाज से पंडितजी सात फेरे दिलाकर विवाह संपन्न कराएंगे। दावत में करीब दो सौ लोग विभिन्न पकवान छकेगें । तैयारियां पूरी कर ली गई हैं  आज षुभ लग्न में दोनों का विवाह कार्यक्रम संपन्न कराया जाएगा। करीब 55 वर्श  के डबल्यू लंेजर वाल्प लांग और 45 साल की एंड्रिया वाल्प लांग पहले से ही षादीषुदा है । षादी के प्रमुख गवाह उनके दो पुत्र डेविड और ओलिवर के साथ सही 14 साल की छोटी बेटी एल्विन भी होगी। इसलिये चर्चा में है मुराई का पुरवा षहर  से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित अमावां ब्लाक इस वक्त चर...

रायबरेली में एक डाक्टर की सेवा ,जांच न दवा, सिर्फ नब्ज पकड़कर बीमारी का पता लगाना

कोई फीस नही स्वेच्छा से जो भी मिला, बस उतने में संतोश किया।  उत्तर प्रदेष की योगी सरकार जहां मोदी सरकार की योजनाओं को प्रदेष के प्रत्येक जिले में आर्युवेदिक चिकित्सा को लेकर काफी उत्साहित दिखाई पड़ रही है। और उनका कहना भी ठीक है कि हमारे देष पुरानी पद्धति को आर्यवेदिक हो या प्राकृतिक चिकित्सा लोगों में काफी महात्व रखती है और इससे नुकसान कम फायदा ज्यादा होता है। और खर्चा भी काफी कम पड़ता हैं। इसी प्राकृतिक चिकित्सा को रायबरेली जिले में एक डाक्टर भगवानदीन यादव जी है जो काफी वर्शो से इस जिले में ही नही कई अन्य जिलों में भी निषुल्क सेवा भाव करते आ रहे है। जहां पर न जाने कितनी जनता और कितने अधिकारियों जो सभी पेषों से जुडे़ रहे है। यहां तक कि जिला अस्पताल के डाक्टर और सीएमओ और न्याय विभाग के न्यायधीष भी इनकी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराकर फायदा लिया है।     जांच न दवा, सिर्फ नब्ज पकड़कर बीमारी का पता लगाना    एक्यूपेषर के जरिये स्वास्थ्य लाभ देना  कोई फीस नही स्वेच्छा से जो भी मिला, बस उतने में संतोश किया।  यही है डाक्टर भगवानदीन ...

नाम गब्बर सिंह है , कलाकार हू , चावल के दानो से पेन्टिंग बनाता हू , नाम लिम्का बुक में दर्ज है

​​रायबरेली लालगंज बैसवारा क्षेत्र के चांदा ग्राम निवासी गब्बर सिंह का नाम उत्तर प्रदेश बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। इस बात की जानकारी देते हुए चित्रकार गब्बर सिंह ने बताया कि बीते 15 अगस्त 2016 को 60 घंटे की अथक परिश्रम के बाद उन्होंने देश की शान तिरंगे की कलाकृति व चावल के दानों से थर्माकोल पर उकेरी थी। यही नही जल दिवस पर भी एक कलाकृति और बनाई थी जिसका स्लोगन था ’ जल है तो कल है ’इस तरह कई अवार्ड और न जाने कितनेे जगह उनको सम्मानित भी किया जा चुका है।  लालगंज बैसवारा क्षेत्र के चांदा ग्राम निवासी गब्बर सिंह का नाम उत्तर प्रदेश बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। कहते है ज्ञान और ज्ञानी का जन्म कब और कहा हो जाये ये पता नही चलता है। फिर चाहे वह गरीब का घर हो या धनवान का ये महात्व नही रखता है। इसी तरह ये लालगंज के रहने वाले गब्बर सिंह एक गरीब परिवार से तालुक रखते है। और इन्होने उस गरीबी में भी अपने को एक अलग मुकाम देने की कोषिष की है। और अगर इसको सरकार और किसी समाज सेवी लोगों से कोई आर्थिक मदद मिल गयी तो यह कलाकार आगे चलकर दुनिया में हिन्दुस्तान का नाम रोषन कर सकता है।  ...

अधिकार और सुरक्षा की नई लड़ाई

साइबर सुरक्षा और निजता के अधिकार का मसला देश में एक गंभीर मुद्दा बनकर उभरा है। अब तो सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला पहुंच गया है। जाहिर है, इसकी पृष्ठभूमि में आधार कार्ड के डाटा ...

रायबरेली जायस

रायबरेली के सबसे पुराने जिलों में से एक जायस अपने शिखर के समय में उद्दयन राजा की राजधानी हुआ करता था। ऐसा माना जाता है कि पद्मावत और अखरावत के लेखक महान कवि मलिक मोहम्मद जायसी का जन्म यहीं पर हुआ था। उनकी समृति में यहाँ जायसी स्मारक भी है।

इन्दिरा गाँधी मेमोरियल बोटैनिकल गार्डन

लखनऊ.वाराणसी राजमार्ग पर स्थित इन्दिरा गाँधी मेमोरियल बोटैनिकल गार्डन को 1986 में स्थापित किया गया था। 57 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला यह सई नदी के उत्तरी तट पर स्थित है। यह स्थान केवल पौधोंए फूलों और बगीचों के लिये ही नहीं है बल्कि अनुसंधान करने वालोंए वैज्ञानिकों और पौधों के बारे में और जानने वालों के लिये एक शैक्षणिक संस्थान भी है। यह गार्डेन कई औषधीय और सजावटी पौधों का घर है। यहाँ पर ग्रीनहाउस के अलावा रॉक गार्डेनए रोज़ गार्डेनए मौसमी गार्डेन और जलीय गार्डेन भी है।

समसपुर पक्षी अभ्यारण्य रायबरेली

समसपुर पक्षी अभ्यारण्य रायबरेली में सलोन के पास स्थित है। 1987 में स्थापित यह अभ्यारण्य 780 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला है। यह अभ्यारण्य बहुत ही शान्त स्थान है और रायबरेली के शोरगुल से राहत देता है। प्रवासी और निवासी दोनो प्रकार की लगभग 250 से अधिक प्रजातियों के घर के रूप में यह अभ्यारण्य उत्तरप्रदेश का प्रमुख पक्षी विहार है। इसमें पाये जाने वाले पक्षियों में गिद्धए किंगफिशरए स्पॉट बिलए सामान्य टीलए विज़न और व्ह्सिलिंग टील प्रमुख हैं। अभ्यारण्य में एक झील भी है जिसमें कई प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं। स्थानीय लोग और पर्यटक यहाँ आकर पक्षियों को देखनेए पिकनिक मनाने या केवल वातावरण की शान्ति को अन्तर्ग्रहण करने का आनन्द लेते हैं। पक्षियों को देखने का सर्वोत्तम समय नवम्बर से मार्च तक का है। यही वह समय होता है जब ऊँचे पहाड़ों से पक्षी और अन्य प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं।

डालमऊ रायबरेली जिले का ऐतिहासिक शहर

पवित्र गंगा नदी के किनारे पर स्थित डालमऊ रायबरेली जिले का ऐतिहासिक शहर है। इस शहर के आकर्षणों में डल राजा का किलाए बड़ा मठ और महेश गिरि मठ प्रमुख हैं। डालमऊ का साहित्यिक इतिहास में भी एक अनूठा स्थान है क्योंकि यह वही स्थान है जहाँ किले पर बैठ कर प्रसिद्ध हिन्दी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी ने नीचे के दृश्यों को देखते हुये अपनी कवितायें लिखी। डालमऊ में नवाब शुजाउद्दौला का इब्राहिम शारिक महल भी है। पर्यटक आल्हा ऊदल की बैठक देखने के साथ.साथ डालमऊ पम्प नहर पर चहल कदमी का आनन्द ले सकते हैं।

इतिहास के पन्नों में खो रहीं धरोहरें

इतिहास के पन्नों में खो रहीं धरोहरें रायबरेली। विश्व धरोहर दिवस तो हम हर साल मनाते हैंए लेकिन उसका मकसद अभी अधूरा है। वीआईपी जिले में अपनों की बेरुखी से जिले की शान मिट रही है। जिनके नाम से जिला जाना जाता हैए उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। चाहे फिर सरकार हो या फिर जिला प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि। सबकुछ जानकर अंजान बने हैं। कभी धन भी आता हैए लेकिन इन धरोहरों की मरम्मत के बजाय उसका घालमेल किया जाता है। सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में कई ऐसी धरोहरें हैंए जो जिले की पहचान हैं। इसमें शहर में शहीद स्मारकए रेवती राम तालाब और डलमऊ नगरी में जनानाघाट और पक्का घाट। उपेक्षा की वजह से ये धरोहरों की हालत खस्ताहाल है। शहीद स्मारक में गंदगी फैली है। मरम्मत के अभाव में शहीद स्मारक जर्जर हो रहा है। अब बात बड़ा कुआं की जाए तो वह भी बदहाल पड़ा है। हालात ये हैं कि शहर का कूड़ा इसी कुएं में फेंका जाता है। बड़ा कुआं को कई बार पर्यटन स्थल का रूप देने के लिए नागरिकों ने आवाज उठाईए लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी और सरकारए जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया। डलमऊ नगरी के जनानाघाट और पक्का घाट का...

रायबरेली की ट्राफिक व्यवस्था को लेकर आशीष सिंह के विचार।

रायबरेली हाल ही में एक समाचार आया कि नीदरलैंड के एक शहर में सड़क की बत्तियों को ज़मीन पर लगा दिया क्योंकि लोग अपने फ़ोन में इतने व्यस्त रहते हैं कि ऊपर सर उठाकर देखना नहीं चाहत...

परीक्षा और प्रश्नपत्रों पर कुछ बेसिक सवाल

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं के पीछे का जितना बैकग्राउंड काम है उसको सँभालने वाले तंत्र कितने विश्वसनीय और योग्य हैं? सामान्यतः सरकार का वह विभाग या एजेंसी जो किसी प्रत...