आज स्वच्छता के लिए बुनियादी क्रांति की आवश्यकता गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर आ गई। एक बार फिर से स्वच्छता अभियान जोर-जोर से मनेगा। हाथों में झाड़ू लिए हुए फोटो भी खींची जाएंगी। सोशल मीडिया पर ऐसी फोटो अपलोड करके जरा सी सफाई की ज्यादा से ज्यादा वाहवाही लूटी जाएगी। स्वच्छता का मतलब सिर्फ झाड़ू उठाना ही नहीं है। जरा सोचिए! स्वच्छता शब्द का क्या यही अर्थ है? अभियान में शामिल होने के पहले स्वच्छता के मायने तो मालूम होने ही चाहिए। महर्षि पतंजलि ने 2200 वर्ष पहले 195 सूत्र लिखे। इनमें सात सूत्र स्वच्छता से संबंधित हैं। दो बाह्य और पांच आंतरिक। आज भी इन सूत्रों की प्रतिष्ठा है। उन्होंने मानस शास्त्र का वर्णन करते हुए मन की स्थितियों का विश्लेषण किया है। पतंजलि ने निरोध प्रवृत्ति या मन से कैसे अलग रहना है, के बारे में भी बताया है। यह सूत्र आज भी प्रासंगिक हैं पर पतंजलि के सूत्रों को सीधे समझना आसान नहीं। महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी संत विनोबा भावे ने वर्ष 1960 में इंदौर में 'सफाई सप्ताह' के दौरान पतंजलि के इन सूत्रों पर विशद् व्याख्यान देकर 'स्वच्छताग्रहि...