निराला जयंती 21 फरवरी पर विशेष, डलमऊ ने दिया हिन्दी कविता को निराला **************************** डलमऊ ने दिया हिन्दी कविता को निराला **************************** डलमऊ रायबरेली महाकवि पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को डलमऊ ने निराला बनाया। बांग्ला भाषा में कविता लिखने वाले निराला को डलमऊ में उनकी विदुषी पत्नी मनोहरा देवी ने हिंदी सिखायी ,उसके बाद वो यहीं रहकर हिंदी कविता के ऐसे अमर गायक बने जो देहधारी होकर भी संतों की परम गति विदेह अवस्था को प्राप्त रहे ।बावजूद इसके डलमऊ में निराला की स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने के लिए शासन स्तर से कोई प्रयास नहीं किए गए सरकार की बेरुखी से डलमऊ में राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाने की वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार रामनारायण रमण की मांग धूमिल सी हो गई है। महाप्राण निराला की ससुराल दालभ्य ऋषि की तपस्थली डलमऊ में थी जो सूफी कवि मुल्ला दाऊद की जन्मस्थली भी है ।निराला के जीवन का लंबा समय इसी डलमऊ में बीता। डलमऊ तहसील मुख्यालय की टिकैट गंज मोहल्ले के पंडित रामदयाल द्विवेदी की बेटी मनोहरा देवी से निराला जी का पाणिग्रहण संस्कार...