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वुडक्राफट व हैन्डीक्राफट के नाम पर जनपद को पहचान दी ' योगी सरकार ने बढ़ाई हस्तशिल्पियों की कीमत



वुडक्राफट व हैन्डीक्राफट के नाम पर जनपद को पहचान दी ' योगी सरकार ने बढ़ाई हस्तशिल्पियों की कीमत 

 योगी सरकार ने बढ़ाई हस्तशिल्पियों  की कीमत


- एक जिला एक प्रोडक्ट ने भटक रहे हस्तशिल्पिओं  को दी पहचान


रायबरेली जनपद को एक नाम मिल गया है। प्रदेश की योगी सरकार ने रायबरेली को एक पहचान दी है। अभी तक लोग अंधेरे में थे। रायबरेली के हैन्डीक्राफट के कारीगर को प्रदेश सरकार ने देश विदेश में व पहचान दी है। जिसके बिना कारीगर इधर उधर भटक रहे थे। प्रदेश सरकार के इस कदम से वुडक्राफट उद्योग को काफी लाभ मिलेगा। रायबरेली में उद्योग एवं उद्योग प्रोत्सहान केन्द्र की  उपायुक्त उद्योग की सविता रंजन ने  पत्रिका से बातचीत के दौरान उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि  प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा एक जिला एक उत्पाद के रूप में जनपद को वुडक्राफट उद्योग को चुना गया है। वुडक्राफट उद्योग का जनपद में  बहुत ही पुराना इतिहास है। रायबरेली के थुलवासा में मुस्ताक असफाक, रेषमाबानो और मोउनीददीन नाम के हस्तषिल्पी व्यक्ति रहते है जो हस्तषिल्प कार्य को पूरी लगन और मेहनत से करते आ रहे है और मुस्ताक को उनको राज्य सरकार ने पुरस्कृत भी किया है । इस पुस्तैनी में उनका पूरा परिवार लगा है। इसके साथ इस गांव के आसपास सैकड़ों परिवार ऐसे हैं। जिनकी कई पीढ़ियां हस्तषिल्प वुडक्राफट उद्योग की परंपरा को बचाकर रखे हैं। सरकार ने अगर इस योजना को पूरी तरह से लागू हो जायेगा तो जिले के अन्य हस्तषिल्पीयों को एक अच्छा रोजगार मिल जायेगा जिससे उनको अपनी आमदनी का एक जरिया मिलने की पूरी उम्मीद है।


मारवल में भी हस्तषिल्पी रायबरेली में है। जो इस परम्परागत व्यवसाय को बनाये रखे है। षीला देवी जो कि श्रीराम कला केन्द्र के नाम से अपना नाम बनाये है। अब अपनी ढलती उम्र के कारण अपनी गुणों और अपनी कला को अपने बच्चों और अन्य लोगों को दे दिया है लेकिन 60 वर्श की उम्र पार कर चुकी है लेकिन आज भी वह काम करने लगती है। 

जिले के श्रमिकों का क्या कहना है

इसी संबंध में श्रमिकों से बातचीत करने पर  श्रमिकों ने बताया कि तमाम हस्तषिल्पी के कारीगर मेहनत के हिसाब से मजदूरी न मिलने के कारण  पलायन भी कर चुके थे। तमाम कारीगर ऐसे हैं, जो दूसरे व्यवसाय से जुड़ गए थे। लेकिन सरकार के इस प्रोजेक्ट को जिले में लाने के बाद कुछ नया काम लोगों को मिलने की पूरी उम्मीद है। जो दूसरे व्यवसाय से जुड़ गये थे। वह दुबारा अपने पराम्परागत व्यवसाय में आने की उम्मीद करने लगें ।  इस विशय में जब गांव के एक बुजुर्ग से बातचीत की तो उनका कहना था कि अगर सरकार इस पर पहले से ध्यान देती तो षायद नये युवा दूसरे व्यवसाय करने अन्य षहरों में न  जाते और घर पर रहकर अपना पुस्तैनी काम  करते और घर में दो पैसे भी आते लेकिन ‘जब जागों तभी सवेरा ’ यह कह कर उन्होने जताया कि अब भी कुछ नही बिगड़ा है अगर योगी सरकार पुस्तैनी व्यवसायों को बढ़ावा देना चाह रही है तो उसका षुक्रिया अदा करता हूं।



वुडक्राफट को यानि हैन्डीक्राफट एक छत के नीचे मिलेगी हस्तशिल्पियों को सारी सुविधाएं



वुडक्राफट व हैन्डीक्राफट के नाम पर जनपद को पहचान दी  

प्रदेश सरकार द्वारा वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत सभी जिला में उस जिले  के परंपरागत उत्पाद से जुड़े लोगों को एक छत के नीचे लाने की योजना बनाई है। 
सहायक आयुक्त राजेष रोमन और अपर साख्यकी अधिकारी लोगों ने भी अपन जानकारियां दी और बताया कि  जहां हस्तषिल्पी श्रमिकों को सभी प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने के साथ में बाजार देने की तैयारी में है। जिसके लिए पूजीं विनयोजन करीब 13 से 14 करोड़ का है।   और जिले का 350 से 400 करोड़ का टर्न ओवर है और साथ ही छोटे व बड़े लोग इस व्यवसाय से करीब 2500 से 4 हजार लोग जुड़े है।  और  जिले में करीब 150 इकाईयां है। सरकार जिले में डिपो बनाने की भी बात कह रही है। जहां हस्तषिल्पीयों को एक ही छत के नीचे सभी तरह के सामान मिलेगा । हर तरह लकडी भी उपलब्ध कराई जायेगी। इससे हस्तषिल्पी इधर उधर नही भटकेगा और एक ही छत के नीचे सब कुछ उपलब्ध हो जायेगा।


हैण्डीक्राफट कार्ड के फायदे


भारत वस्तु मंत्रालय द्धारा हैण्डीक्राफट यानि हस्तषिल्पीयों को उपलब्ध कराया जाता है। जिसे ये कार्ड मिलता है वह एक होनहार और बारीकी काम करने वाला हस्तषिल्प कार माना जाता है तभी भारत सरकार उसको इस तरह के कार्ड उपलब्ध कराता है। और ये कार्ड मेले मे लगाने और भारत सरकार की सरकारी योजनाओं में भी काम करता है। और इससे काफी फायदा मिलता है। अभी तक जिले में गणना करने पर करीब कुषल 500 षिल्पी मिले है।  और करीब 500 लोगों ने आगे के लिये आवेदन भी किये है। जो वस्तु मत्रांलय भेज दिये गये है। जिसमें से 150 से 200 षिल्पकार के पहचान पत्र आ गये है।

वुडक्राफट और हस्तषिल्प में ज्यादातर निम्न अल्पसंख्यक वर्ग जुड़ा है
अधिकारियों की बात करें तो ज्यादातर इसमें निम्न अल्पसंख्यक वर्ग इस हस्तषिल्प व्यवसाय में कार्य कर रहे है। 


सरकार जिले के गांव से लेकर षहर तक करायेगी प्रचार-प्रसार

रायबरेली की उपायुक्त उद्योग सविता रंजन ने बताया कि हम लोग जल्द ही जिले में गांव के ग्राम पंचायतों से लेकर नगर  तक में इस हस्तषिल्प योजना का प्रसार प्रचार करेगें और साथ ही स्कूलों में प्रबंधकों से भी बातचीत करेगें जिससे ये कुटीर उद्योग जैसे कार्यक्रम को बढावा मिल सके जिससे लोग इसका ज्यादा ज्यादा फायदा उठाये। 

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