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वीवीआईपी जिले में मनरेगा काम में बाधक बनी प्रधान और रोजगार सेवक की नीति,न्याय की आश लिये मजदूर

वीवीआईपी जिले में मनरेगा काम में बाधक बनी प्रधान और रोजगार सेवक की नीति,न्याय की आश लिये मजदूर

 रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ग्रामीणों को रोजगार देने की बात कर रहे है। लेकिन लॉक डाउन के  दौरान ग्रामीण और प्रवासी मजदूर एक ओर जहाँ दर-दर की ठोकरे तो खा ही रहा है वहीं दूसरी ओर रोजगार सेवक और प्रधानगण केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को भी पलीता लगाने से भी नही चूक रहे है। खीरों ब्लाॅक में प्रधान और रोजगार सेवक की मिली भगत से मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
 
मनरेगा काम में बाधक बनी प्रधान और रोजगार सेवक की नीति

ताजा मामला खीरों ब्लॉक की ग्राम सभा कालूपुर का है,जहां पर ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की अनबन इस महामारी के दौर में मजदूरों की परेशानी का कारण बन चुकी है। सैकड़ों की संख्या में कालूपुर के मजदूरों ने  खंड विकास कार्यालय  पहुंच कर  अपनी  पीड़ा बताने के लिए, ब्लाक परिसर को घेर लिया।मजदूरों ने बताया कि न तो हमें मनरेगा में काम दिया जा रहा है,और जो काम हुआ भी है तो उसका  भुगतान नही किया जा रहा है।मजदूरों ने रोजगार सेवक पर दुर्व्यहार के साथ काम न देने का आरोप लगाया।मामला जब काफी उग्र हो गया तो खण्ड विकास अधिकारी की अनुपस्थिति में सहायक विकास अधिकारी पंचायत ने मजदूरों को समझाबुझा कर शांत कराया और आश्वासन दिया कि मामले की जांच करके कार्यवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 रोजगार सेवक विवेक कुमार से बात की तो बताया

जब रोजगार सेवक विवेक कुमार से बात की तो बताया कि मजदूर मानक के अनुरूप कार्य नही करना चाह रहे,जिससे भौतिक सत्यापन में काम कम होने पर मजदूरी तय राशि से कम निर्गत होती है।वहीं प्रधान छेदाना देवी ने रोजगार सेवक पर ही मजदूरों से समान व्हवहार न करने का आरोप लगाया और बताया कि रोजगार सेवक मनमानी करता है।अब देखना ये है कि प्रधान और रोजगार सेवक के आपसी खराब सम्बन्धो के कारण मजदूरों को  रोजी रोटी का जुगाड़ होता है,उनको न्याय मिलता है या रोज-रोज इस कठिन दौर में सिर्फ धरना प्रदर्शन में ही समय बिताना  पड़ता है।

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