रायबरेली में एक माता पिता अपने जिगर के टुकड़े को ढूढ़ने के लिए न जाने कितनी राते और कितने दिन इसी उम्मीद में बिता दी की एक दिन मेरे जिगर का टुकड़ा मुझे देखकर चिल्लाता हुआ बोलेगी की पिता जी लो मैं आ गयी हूँ। लेकिन शायद अभी उसके लिए एक सपना होगा । लेकिन योगी सरकार शायद ये सपना हो सकता है हकीकत में बदल सकते है। पर जब इसको मिलने का मौका मिला जाएगा।
ये मामला अखिलेश सरकार में हरचंदपुर के ओई गांव का एक बेबस पिता अपनी छह साल की बच्ची की खोज के लिए डेढ साल से रायबरेली से लेकर लखनऊ तक पुलिस अधिकारियों की चौखट पर चक्कर लगाता रहा लेकिन बेटी का कहीं कोई अता-पता नहीं लग सका। मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिक सेल के हाथ में है लेकिन जांच जहां एक पग भी आगे नहीं बढ़ सकी है। अब सरकार बदलने पर पिता को लगा है कि शायद नए निजाम में उसकी बेटी का सुराग लग सके तो इस लिहाज से उसने योगी आदित्यनाथ के दरबार में अपनी गुहार लगाएगा।
हरचंदपुर के मजरा आई निवासी राजाराम की छह साल की बच्ची अंशिका 16 सितंबर 2015 को अपनी मां आशा देवी के साथ पड़ोस के एक घर गयी थी। कुछ देर बाद अंशिका मां से घर जाने का बात कहकर वहां से चल पड़ी। उसके बाद उसका कोई पता नहीं लग सका। घर पहुंचने पर आशा देवी ने बड़ी बेटी आरती से मालूमात की तो उसने बताया कि अंशिका घर नहीं आयी। इसके बाद अंशिका को खोजने का सिलसिला शुरू हुआ लेकिन राजाराम के हाथ खाली रहे। दो दिन बाद हरचंदपुर पुलिस को मामले की जानकारी दी गयी तथा गांव की गुरुदेई, बिटाना, अखबर अली, राम प्यारे , संतोष पर बच्ची को गायब करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने राजाराम के आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
राजाराम कहते हैं कि पुलिस उन लोगों पर कड़ाई नहीं कर रही है जिन पर उसने आरोप लगाया है। वह मामले को योगी आदित्यानाथ के पास ले जाएगा।
© Please use proper referencing if you are taking any material from this blog.
यदि आप इस ब्लॉग से कोई सामग्री ले रहे हैं, तो कृपया इस ब्लॉग का समुचित उल्लेख करें.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें